लखनऊ: उत्तर प्रदेश शासन के मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने यूनिसेफ के सहयोग से राजधानी लखनऊ में किशोर पोषण पर ‘मजबूत शरीर और कुशाग्र मस्तिष्क का पोषण’ विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किशोर-किशोरियों में पौष्टिक आहार और स्वस्थ जीवनशैली की आदतें विकसित करना रहा, ताकि आठ करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पूरा किया जा सके। इस दौरान विशेषज्ञों ने चेताया कि यदि पोषण सुधार की दिशा में ठोस कदम न उठाए गए तो यूनिसेफ की हालिया रिपोर्ट में सामने आई चिंताजनक स्थिति और गंभीर हो सकती है।
कार्यक्रम का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव लीना जोहरी, महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा, स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त निदेशक मातृ स्वास्थ्य डॉ. शालू, यूनिसेफ के कार्यक्रम प्रबंधक अमित मेहरोत्रा, राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. अजय गुप्ता, एसजीपीजीआई की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पियाली भट्टाचार्य और केजीएमयू की विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका अग्रवाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर शिक्षा, स्वास्थ्य व महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ, शिक्षक और बच्चे शामिल हुए।

लीना जोहरी ने कहा कि सरकार बच्चों और महिलाओं के पोषण सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। पोषण अभियान और आंगनबाड़ी सेवाओं से स्कूलों में उपस्थिति बढ़ी है और परिवारों में पोषण स्तर भी सुधरा है। लेकिन जंक फूड के बढ़ते आकर्षण को देखते हुए बच्चों को पोषक आहार और खेलकूद की ओर प्रेरित करना बेहद ज़रूरी है। इसमें मीडिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

कंचन वर्मा ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित उत्तर प्रदेश और भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो। इसके लिए उचित पोषण और स्वस्थ जीवनशैली अनिवार्य है। शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर किशोरों के पोषण पर काम कर रहे हैं, लेकिन शिक्षकों को लगातार प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।
डॉ. अजय गुप्ता ने राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और विफ्स के तहत चल रही गतिविधियों की जानकारी दी। वहीं अमित मेहरोत्रा (यूनिसेफ) ने कहा कि चयनित स्कूलों में बच्चों का पोषण आकलन किया जाएगा, जिससे सरकार को नीतिगत निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
डॉ. पियाली भट्टाचार्य (एसजीपीजीआई) ने जीवन के शुरुआती 1000 दिनों और किशोरावस्था में पोषण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। वहीं, डॉ. प्रियंका बंसल (आईसीएमआर) ने एनीमिया और कुपोषण पर चल रहे शोध साझा किए।
बॉक्स कार्यशाला में आये सुझाव
– स्कूलों के पाँच मीटर के दायरे में जंक फूड स्टाल प्रतिबंधित करना।
– बच्चों को फ़ूड लेबल पढ़ने और पोषण शिक्षा देना।
– शिक्षकों के प्रशिक्षण को मज़बूत करना।
– पोषण कार्यक्रमों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून से जोड़ना।
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यूनिसेफ की रिपोर्ट से चेतावनी
कार्यक्रम में हाल ही में जारी चाइल्ड न्यूट्रिशन ग्लोबल रिपोर्ट 2025 का हवाला देते हुए बताया गया कि मोटापा पहली बार वैश्विक स्तर पर बच्चों में अल्पवज़न को पीछे छोड़ चुका है। हर दस में से एक बच्चा, यानी करीब 18.8 करोड़ बच्चे मोटापे से ग्रसित हैं। भारत जैसे मध्यम आय वर्ग वाले देशों में यह समस्या तेज़ी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने चेताया कि यदि समय रहते ठोस कदम न उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों का स्वास्थ्य और भविष्य दोनों प्रभावित होंगे।
